भारतीय टेलीविजन का गोल्डन पीरियड केवल पौराणिक गाथाओं तक सीमित नहीं था। साल 1988 में दूरदर्शन के पर्दे पर एक ऐसा ऐतिहासिक और क्रांतिकारी धारावाहिक शुरू हुआ, जिसने भारतीय दर्शकों को उनके वास्तविक इतिहास और जड़ों से रूबरू कराया। अक्सर लोग 80 के दशक के ऐतिहासिक शोज के नाम पर 'रामायण' या 'महाभारत' को ही याद करते हैं, लेकिन इसी दौर में एक ऐसा शो भी बना जिसकी नींव खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सुझाव पर रखी गई थी। उनका विचार था कि जिस तरह पौराणिक कथाओं को देश में अपार प्रेम मिल रहा है, उसी तरह भारत के गौरवशाली और वास्तविक इतिहास को भी एक भव्य शो के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जाना चाहिए।
पंडित नेहरू की कृति और श्याम बेनेगल का निर्देशन
प्रधानमंत्री के इस दूरदर्शी सुझाव को मशहूर निर्देशक श्याम बेनेगल ने एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। यह शो पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रसिद्ध पुस्तक 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' पर आधारित था, जिसे 'भारत एक खोज' के नाम से जाना गया। श्याम बेनेगल ने इस प्रोजेक्ट के लिए न केवल अपनी पूरी रचनात्मक ऊर्जा झोंक दी, बल्कि इसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए एक बहुत बड़ी टीम तैयार की। इस धारावाहिक की स्क्रिप्टिंग की प्रक्रिया किसी शोध कार्य से कम नहीं थी।
इस शो को बनाने में लगे 35 इतिहासकार
शमा जैदी के नेतृत्व में लगभग 25 लेखकों और 35 प्रतिष्ठित इतिहासकारों की एक टीम ने दिन-रात काम किया। इनका एकमात्र लक्ष्य था कि हर एपिसोड तथ्यों की कसौटी पर खरा उतरे और ऐतिहासिक सटीकता में कोई कमी न रहे। इस विस्तृत पटकथा को तैयार करने में करीब 11 महीने और 17 दिन का समय लगा, जिसके बाद 53 एपिसोड की यह बेमिसाल सीरीज दर्शकों के सामने आई।
हजारों कलाकारों का मंच और अभिनय की पाठशाला
'भारत एक खोज' ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया। इस शो की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विशाल स्टारकास्ट थी। शो में लगभग 1000 से अधिक कलाकारों ने काम किया, जिनमें से 350 से ज्यादा नए चेहरों को अपना करियर शुरू करने का मौका मिला। यह शो उस दौर के उभरते हुए कलाकारों के लिए अभिनय की एक चलती-फिरती पाठशाला बन गया था।
नेहरू के रोल में थे रोशन सेठ
शो के मुख्य सूत्रधार और पंडित नेहरू की भूमिका में रोशन सेठ नजर आए, जिन्होंने अपनी नक्काशीदार आवाज और सधे हुए अभिनय से दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। दिग्गज अभिनेता ओम पुरी ने इस सीरीज में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय देते हुए कभी अशोक, कभी औरंगजेब तो कभी दुर्योधन जैसे विविधतापूर्ण किरदारों को जीवंत किया। इनके अलावा नसीरुद्दीन शाह, अमरीश पुरी, शबाना आजमी, इरफान खान, पीयूष मिश्रा और लकी अली जैसे मंझे हुए कलाकार भी इस सफर का हिस्सा रहे, जो आज भारतीय सिनेमा के स्तंभ माने जाते हैं।
दिया गया अनेकता में एकता का संदेश
इस धारावाहिक की शूटिंग के लिए केवल स्टूडियो का सहारा नहीं लिया गया, बल्कि निर्देशक ने इसे वास्तविक रूप देने के लिए देशभर की ऐतिहासिक लोकेशनों का रुख किया। ताजमहल से लेकर पश्चिमी घाट की पहाड़ियों तक इस शो के दृश्यों को फिल्माने के लिए भव्य पैमाने पर तैयारियां की गईं। हर रविवार सुबह 11 बजे जब यह शो प्रसारित होता था तो देश की धड़कनें इसके साथ जुड़ जाती थीं।
दिखाई 5000 साल की कहानी
'भारत एक खोज' ने केवल 5000 साल पुराने इतिहास का वर्णन नहीं किया, बल्कि भारत की 'अनेकता में एकता' की संस्कृति को विश्व पटल पर मजबूती से रखा। इसने न केवल टीवी रेटिंग के रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि एक ऐसी विरासत छोड़ गया जो आज भी इतिहास के छात्रों और कला प्रेमियों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है। इस सीरीज ने साबित किया कि अगर विजन स्पष्ट हो और रिसर्च गहरी तो इतिहास को भी मनोरंजन के साथ बखूबी पेश किया जा सकता है।